भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को अचानक भारी बिकवाली देखने को मिली, जिससे निवेशकों के बीच चिंता का माहौल बन गया। कारोबार के दौरान सेंसेक्स 1150 अंक तक लुढ़क गया, जबकि निफ्टी करीब 400 अंक टूटकर 23,500 के स्तर के आसपास पहुंच गया। इस बड़ी गिरावट ने निवेशकों के करोड़ों रुपये डुबो दिए और बाजार में दहशत का माहौल पैदा कर दिया।
बाजार में क्यों आई इतनी बड़ी गिरावट?
1. अमेरिका-ईरान तनाव बना बड़ी चिंता
ग्लोबल स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव निवेशकों की चिंता का प्रमुख कारण बना। रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों देशों के बीच युद्धविराम और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर प्रतिबंध हटाने को लेकर बातचीत हुई है, लेकिन अभी तक कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है। इस अनिश्चितता का असर वैश्विक बाजारों के साथ भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला।
2. इंडिया VIX में तेज उछाल
बाजार में डर और अनिश्चितता को मापने वाला इंडिया VIX करीब 6% बढ़कर 15.91 पर पहुंच गया। VIX में तेजी आमतौर पर बाजार में बढ़ती अस्थिरता और निवेशकों की घबराहट का संकेत मानी जाती है।
3. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली
विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) लगातार भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। वर्ष 2026 में अब तक एफआईआई 2.20 लाख करोड़ रुपये से अधिक की बिकवाली कर चुके हैं। सिर्फ बुधवार को ही विदेशी निवेशकों ने करीब 1040 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे, जिससे बाजार पर दबाव बढ़ा।
4. मुनाफावसूली भी बनी वजह
लगातार तेजी के बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी। आने वाले अवकाश और वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए कई निवेशकों ने अपने पोर्टफोलियो में मुनाफा बुक करना बेहतर समझा। इसका असर लगभग सभी सेक्टरों में देखने को मिला।
किन सेक्टरों में सबसे ज्यादा गिरावट?
गिरावट का असर पूरे बाजार पर दिखाई दिया। ऑटो, बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज, मेटल और ऑयल एंड गैस सेक्टर में 2% से अधिक की कमजोरी दर्ज की गई। वहीं आईटी और कंज्यूमर गुड्स सेक्टर ने बाजार को कुछ सहारा देने की कोशिश की, लेकिन बड़ी बिकवाली के सामने यह प्रयास नाकाम रहा।
हैवीवेट शेयरों ने बढ़ाया दबाव
बाजार की गिरावट में बड़े शेयरों का भी अहम योगदान रहा।
- रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर करीब 2% टूटे।
- टीसीएस में 1% से ज्यादा की गिरावट दर्ज हुई।
- बजाज फाइनेंस के शेयर 2.45% फिसले।
- सन फार्मा करीब 2% नीचे आया।
- पावरग्रिड के शेयरों में 4% तक की बड़ी गिरावट देखने को मिली।
- इंडिगो और टाटा स्टील भी प्रमुख गिरने वाले शेयरों में शामिल रहे।
BSE के टॉप-30 शेयरों में से केवल 4 शेयर ही बढ़त में कारोबार कर रहे थे, जबकि 26 शेयर लाल निशान में दिखाई दिए।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी गिरावट के दौरान घबराकर फैसले लेने से बचना चाहिए। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मजबूत कंपनियों में गिरावट खरीदारी का अवसर भी बन सकती है। हालांकि, निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखें।
निष्कर्ष
शेयर बाजार में आई यह गिरावट मुख्य रूप से वैश्विक अनिश्चितताओं, एफआईआई की बिकवाली, बढ़ते VIX और मुनाफावसूली का संयुक्त प्रभाव है। आने वाले दिनों में अमेरिका-ईरान से जुड़े घटनाक्रम और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर बाजार की दिशा काफी हद तक निर्भर करेगी। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने और जल्दबाजी में फैसले लेने से बचने की सलाह दी जा रही है।
Disclaimer: शेयर बाजार में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से परामर्श अवश्य करें। यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है और इसे निवेश सलाह नहीं माना जाना चाहिए।
