Vedanta Demerger: अब निवेशकों की नजर इन 4 नई कंपनियों की लिस्टिंग पर, जानिए किसे कितना मिलेगा हिस्सा

माइनिंग और मेटल सेक्टर की दिग्गज कंपनी Vedanta के डीमर्जर के बाद अब निवेशकों की नजर उन चार नई कंपनियों की लिस्टिंग पर टिकी हुई है, जो समूह से अलग होकर शेयर बाजार में आने वाली हैं। कंपनी ने हाल ही में इक्विटी शेयरों के लिए ‘अधिग्रहण लागत अनुपात’ (Cost of Acquisition Ratio) जारी किया है, जिससे निवेशकों को टैक्स और निवेश वैल्यू समझने में मदद मिलेगी।

डीमर्जर के बाद वेदांता समूह पांच अलग-अलग बिजनेस यूनिट्स में बंट जाएगा। इनमें Vedanta Limited पहले से लिस्टेड है, जबकि बाकी चार कंपनियों की लिस्टिंग अभी होनी बाकी है।

किस कंपनी की कितनी हिस्सेदारी?

कंपनी की एक्सचेंज फाइलिंग के मुताबिक, कुल अधिग्रहण लागत में सबसे बड़ा हिस्सा Vedanta Limited का रहेगा। इसके बाद सबसे बड़ी हिस्सेदारी Malco Energy की होगी।

अधिग्रहण लागत अनुपात

  • Vedanta Limited – 52.34%
  • Malco Energy (Vedanta Oil & Gas) – 21.49%
  • Talwandi Sabo Power (Vedanta Power) – 12.23%
  • Vedanta Aluminium Metal – 7.15%
  • Vedanta Iron and Steel – 6.79%

निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है?

मान लीजिए किसी निवेशक ने डीमर्जर से पहले Vedanta के ₹10,000 के शेयर खरीदे थे। डीमर्जर के बाद यह लागत अलग-अलग कंपनियों में इस प्रकार बंट जाएगी:

  • Vedanta – ₹5,234
  • Malco Energy – ₹2,149
  • Talwandi Sabo Power – ₹1,223
  • Vedanta Aluminium Metal – ₹715
  • Vedanta Iron and Steel – ₹679

यानी निवेशक की कुल लागत ₹10,000 ही रहेगी, लेकिन टैक्स कैलकुलेशन और भविष्य में शेयर बेचने के दौरान हर कंपनी की अलग अधिग्रहण लागत मानी जाएगी।

हालांकि, यह अनुपात केवल लागत वितरण के लिए है। इसका मतलब यह नहीं है कि नई कंपनियां इन्हीं कीमतों पर लिस्ट होंगी।

किन कीमतों पर हो सकती है लिस्टिंग?

ब्रोकरेज फर्म Nuvama ने इन डीमर्ज्ड कंपनियों के संभावित टारगेट प्राइस जारी किए हैं।

संभावित टारगेट प्राइस

  • Vedanta (Zinc & Copper) – ₹336 प्रति शेयर
  • Vedanta Aluminium – ₹477 प्रति शेयर
  • Vedanta Oil & Gas – ₹47 प्रति शेयर
  • Vedanta Power – ₹47 प्रति शेयर
  • Vedanta Steel & Iron Ore – ₹30 प्रति शेयर

क्यों अहम है Vedanta का डीमर्जर?

विशेषज्ञों का मानना है कि डीमर्जर के बाद हर बिजनेस यूनिट को अलग पहचान और बेहतर वैल्यूएशन मिल सकता है। इससे निवेशकों को कंपनी के अलग-अलग बिजनेस में निवेश का सीधा मौका मिलेगा।

मेटल, पावर, ऑयल एंड गैस और एल्युमीनियम जैसे सेक्टर्स में अलग-अलग फोकस होने से कंपनियों की ग्रोथ और पारदर्शिता बढ़ने की उम्मीद की जा रही है।

डिस्क्लेमर

यह जानकारी विभिन्न रिपोर्ट्स और ब्रोकरेज अनुमानों पर आधारित है। शेयर बाजार में निवेश जोखिमों के अधीन है। निवेश से पहले वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें।

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